भेऴी हूगी अमोस पून्यू भेऴी तेरस तीज वोट ले'र सरपंचा बोल्या हट काचर रा बीज पग झाल्यां परभात उघड़ी गिया नोटां में भीज देसी पी'र ढेंकड़्यां केवे हट काचर रा बीज बळतीया के लाय लागी हुई प्रोपर्टीयां सीज आखा देख गरूजी बोल्या हट काचर रा बीज दियाळी रा होळी धोकी राखी ने आखा तीज सरपंचा रा भाग फुटग्या हटट काचर रा बीज फेर चुनाव वोट ने आयो गिया देवणिया खीज़ लात मार सरपंच ने बोल्या हट काचर रा बीज घणी दिराई फांक्यां टिकड़्यां घणी दिराई चीज़ दारू मायां गांव डूबग्या हट काचर रा बीज
ओ भारत है, नव विश्व गुरु
इतिहास बांचतो कल्पतरू
लाशां नदियां में, रक्त भौम
किस बिध ई व्यथा रो बखान करूं
नेता तो रकत रा तिरसा है
भाला बरसे सत्ता रे घरूं
मन खून रा आंसू कूके है
मरता री गिणत रो जो ध्यान धरूं
जीवत रा प्राण बचावणीया
थने पुन पुन 'मेघ' प्रणाम करूं
मुर्दा ने नोच के खावणीया
थारे पाप रे घड़ा में रीस भरूं
जद घड़ा फूट कर बिखरेला
थने वादो म्हें बी दिन रो करूं
जद नोच गिरज तने खावे ला
बी दिन री नींव म्हें आज धरूं
जो युद्ध हुवेगो अगले दिन
बी रण भेरी रो गाज करूं
म्हारे मृत्यु री इच्छा राखणीया
म्हें आज मरूं ना काल मरूं

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