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हट काचर रा बीज

भेऴी हूगी अमोस पून्यू  भेऴी तेरस तीज  वोट ले'र सरपंचा बोल्या  हट काचर रा बीज  पग झाल्यां परभात उघड़ी  गिया नोटां में भीज  देसी पी'र ढेंकड़्यां केवे  हट काचर रा बीज  बळतीया के लाय लागी  हुई प्रोपर्टीयां सीज  आखा देख गरूजी बोल्या  हट काचर रा बीज  दियाळी रा होळी धोकी  राखी ने आखा तीज  सरपंचा रा भाग फुटग्या  हटट काचर रा बीज  फेर चुनाव वोट ने आयो  गिया देवणिया खीज़  लात मार सरपंच ने बोल्या  हट काचर रा बीज  घणी दिराई फांक्यां टिकड़्यां  घणी दिराई चीज़  दारू मायां गांव डूबग्या  हट काचर रा बीज

उभरते चमचे




काल उग्येड़ा बूंटा 
पर सुखा इंतजाम 
पाणी रेड़े धुड़ में
 कादो लेवे काम 
काचरा के बीज ज्यूं 
तिर तिर उंचा आवे 
डोका खांगा हुवे तो कोनी 
गढ़ खांगा बतावे 
मुंडो कर के छाछ ज्यूं
 लेवे लंबो नाम 
पाणी रेड़े धुड़ में
 कादो लेवे काम 
धोळा कुरता घाल गमछिया 
बळज्याणा डोळ देखावे 
बातां चमचम रसगुल्ला री 
मिरच्या लुखी खावे 
बिक्या बता के सामले ने 
खुद मांगे मोटा दाम 
पाणी रेड़े धुड़ में 
कादो लेवे काम 
बण्या फिरे ऐ क्रांतिकारी 
नास्यां उंची चढ़ावे 
दो रिपीया रो स्वांग कोनी 
चंदो घणो ले जावे 
दिन फिरे चमचा रे सागे 
रात ने भैरु धाम 
पाणी रेड़े धुड़ में 
कादो लेवे काम
मन में काडे दांत घणा
सामी सबरे कूके
चार इंच री उंदरी
सीधी मुंह पर थूके
थूक ने सुख्या टेम नी लागे
ए चाट के काडे नाम
पाणी रेड़े धूड़ में
कादो लेवे काम

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इतिहास बांचतो कल्पतरू

ओ भारत है, नव विश्व गुरु इतिहास बांचतो कल्पतरू लाशां नदियां में, रक्त भौम किस बिध ई व्यथा रो बखान करूं नेता तो रकत रा तिरसा है भाला बरसे सत्ता रे घरूं मन खून रा आंसू कूके है मरता री गिणत रो जो ध्यान धरूं जीवत रा प्राण बचावणीया थने पुन पुन 'मेघ' प्रणाम करूं मुर्दा ने नोच के खावणीया  थारे पाप रे घड़ा में रीस भरूं जद घड़ा फूट कर बिखरेला थने वादो म्हें बी दिन रो करूं जद नोच गिरज तने खावे ला बी दिन री नींव म्हें आज धरूं जो युद्ध हुवेगो अगले दिन बी रण भेरी रो गाज करूं म्हारे मृत्यु री इच्छा राखणीया  म्हें आज मरूं ना काल मरूं