भेऴी हूगी अमोस पून्यू भेऴी तेरस तीज वोट ले'र सरपंचा बोल्या हट काचर रा बीज पग झाल्यां परभात उघड़ी गिया नोटां में भीज देसी पी'र ढेंकड़्यां केवे हट काचर रा बीज बळतीया के लाय लागी हुई प्रोपर्टीयां सीज आखा देख गरूजी बोल्या हट काचर रा बीज दियाळी रा होळी धोकी राखी ने आखा तीज सरपंचा रा भाग फुटग्या हटट काचर रा बीज फेर चुनाव वोट ने आयो गिया देवणिया खीज़ लात मार सरपंच ने बोल्या हट काचर रा बीज घणी दिराई फांक्यां टिकड़्यां घणी दिराई चीज़ दारू मायां गांव डूबग्या हट काचर रा बीज
"पापा काई लाया?" भोलू चौखट में बड़ते बाप ने देख 'र केयो
"साग लाया बेटा, ले टमाटर खा ले" एक गल्यूडो टमाटर बेटे सामी कर के जगलो पिता भाव देखायो।
"ओ कई है पापा?" बाप री जेब सामी आंगली कर के भोलू बोल्यो
"ओ, ओ तो पर्चो है बेटा, इरे माथे गोरख नाथ जी रो फोटू है, आंपा छप्परिये में लगावां"
बाप बोल्यो
"नाथ कई हुवे पापा" भोलू बोल्यो
"नाथ हुवे बो जिको सब लोगा रो ध्यान राखे, भूखा ने रोटी देवे, तिरसा ने पाणी पावे, टाबरां रो लाड राखे" जगलो हंस के जवाब दियो
"तो थें नाथ हो कई पापा" भोलू बाप रो हाथ झाल के केयो और जगलो बीरी बात पर मुस्कुरा दियो
जगले रे घर री हालत इति चोखी कोनी ही, रिपियो तो देखण ने ही कोनी हो। दिन में कोई दस रुपिया कमा'तो जीका री साग सब्जी लियातो। घर री नांव माथे 2 छपरिया हा, बे भी टुटुडा। पर फिर भी बो हमेशा खुश ही लाधतो।
घर में बे 4 जना हा । बो, बीरी लुगाई लाछी और बिरो 4-5 सालां रो छोरो ' भोलू ' और एक बकरी जीकी ने बो लाडू केंवतो।
जगलो आप तो पढ़ लिख नी पायो पर बिरी इच्छा ही के भोलू ने चोखी इसकुल में पढ़ाऊं पर रुपिया रे अभाव रे नीचे बा इच्छा भी दबीजुड़ी ही। पर फिर भी जगले रो जीवन चोखी तरह सूं चाल रियो हो।
बो रोज शहर में जा तो और कमठानो करतो पर मजूरी बोहत कम ही मिलती, सुबह शहर में पीपल रे गट्टे माथे बैठो रेतो, किनी जरूरत हुती मजुर री तो बो ले जातो।
एक दिन इंया ही गट्टे माथे बैठा हा तो कोई पुलिसियो आ गियाे, आता ही डंडा मारण लाग गियो।
"थां लोगा ने ठा नी है के लॉकडाउन लाग गियो, घर मरो थांरे" पुलिसियो गर्ज्यो और सेंगा ने दौड़ा दिया।
जगलो पाछो गांव आ गियो, मारग में मास्टर जी मिल्या तो बाने पूछ्यो की ओ लॉकडाउन कई अडंगो है तो बां बतायो की कोई बीमारी आई है चीन देश सूं, बा सब ने नी लाग जावे इरे वास्ते 1 दिन खातर सब काम धंधा बंद करिया है गोरमिंट। लॉकडाउन में घर सु बारे निकले जने पुलिस आला ठोके।
जगले ने बात तो समझ कोनी आई पर इत्तॉ ठा पड़ गियो के बारे निकले जीका ने ठोके। बो मास्टर जी ने राम राम कर के घर सामी गयो परो। सोच्यो एक दिन री ही बात है।
अगले दिन उठ्यो और शहर जाने खातर त्यार होयो। शहर पुग्यो तो ठा लाग्यो के सरकार लोकडाउन ने और बढ़ा दियो। पुलिस दिखी तो दौड़तो पाछो आयो। मन ही मन सरकार ने गालियां काडतो घर पुग्यो। बी रात नींद कोनी ली, पूरी रात सोचतो रियो के अब घर किया चालसी। रुपिया तो देखन ने ही कोनी। सुबह हुई तो फिर सूं शहर पुग गियो। पुलिस री मार खाई तो पाछो आ गियो। तीन चार दिन इंया ही मार खातो रेयो, पर बाद में पसर गियो।
"अब मार खाइजे कोनी" लुगाई ने केयो
"तो अब कई करा, घरे तो आटो ही कोनी" लाछी बोली
"किं तो जुगाड करनो पड़सी " और इंया के 'र दोनु सो गिया।
अगले दिन पीले बादल जगलो घोन ने खोल के ले गियो और पाछो आयो जद 2000 रुपिया लायो। लुगाई बाट जोहती बीने आतो देख र बोली
"लाडू कठे?"
"लाडू ने तो बेच दी"जगलेे केयो "ई लोकडाउन में आंपारो पेट भरनो ही ओखो हुवे लाडू ने कियां सांभा"
"किने दिन्ही" लाछी बोली
"सरपंच ने, 2000 दिया लाडू रा" जगलो जेब माथे हाथ राख के बोल्यो "आंपरो तो लॉकडाउन निकल जाई जने पाछी ले आवा"
और इया केह के बो फेर सु बारे निकल गियो
कुछ दिन तो बे 2000 रुपिया सु घर चलायो पर रुपिया एक दिन खत्म हुगिया, लॉकडाउन खत्म ही नी हूयो। फिर सूं भूखा मरने रा दिन आ गिया। लॉकडाउन कई महीना चाल्यो। घर में आटो ही कोनी हो। जगलो गांव में गयो ताकि कोई खनू ओधार रुपिया ले सके पण कोई तरस नी खायो। थक हार के जगलो एक पेड़ नीचे बैठ गियो। थोड़ी देर बाद खन कर मास्टर जी निकल्या तो जगलो बाने हेलो मार के खने गेयो।
बोल्यो "प्रणाम करूं माठ साब"
"हां बोल भाई जगला" मास्टर जी बोल्या
"साहब लॉकडाउन कद खतम हुई"
"अरे लोग तो करोना स्यूं मरण लाग रिया है और तने लॉकडाउन की पड़ी है" मास्टर जी बीने झीडक्यो
"मास्टर जी लोग तो करोना स्यूँ पेली भूखा मर जाई, सरकार की करे तो कोनी"
"घणो ही करे सरकार, जीका मरे बांरे टाबरा रो सोई खर्चों उठावे " मास्टर जी बोल्या " अब टाइम खोटी ना कर, म्हारे कोरोना में ड्यूटी लागुड़ी है, लेट हुजई" और आ बात के'र मास्टर जी निकल गिया।
जगलो मन में सोची के सरकार तो सिर्फ बाने ही धन देवे जीका खनें है, गरीब ने तो की नी देवे । मास्टर री तो करोना में भी धाड़ी चालू है और म्हाने आडे दिन भी लोग पूछे कोनी। फेर सोच्यो के सरकार तो सिर्फ मरणीया रा खर्चा उठावे, जीवता ने तो भूखा मारे। इन्या ही सोचता सोचता घर खानी बढ्यो। मार्ग में भिड़ देख के एक जग्या रुक ग्यो। किनी पूछताछ करी तो कोई बतायो के रामधन फांसी खा ली पूरे परिवार साथे। कारण पूछ्यो तो कोई एक जवाब कोनी आयो पर लोग बतायो के लारले साल फसल चोखी कोनी हुई और एस कर्जल हुयेडो हो।
जगलो खेल्डियां माथे लटकुडी लाशां स्यूँ नजरा छुपातो घर पुग ग्यो। दो तीन दिन तक भूखा धिकायो ताकि टाबर जीम सके पर अब टाबर रे जीमन ने भी टुकड़ा कोनी हा। फेर दो दिन टाबर लुगाई साथे भूखा मरियो।
एक दिन आधी रात ने लुगाई ने जगायो और बोल्यो अब सब खतम हुगीयो। अब एक ही मारग है ई भूख ने खत्म करने रो। रात ने एक मजबूत जेऊड़ी ले कर पेला लुगाई ने फांसी लगाई फेर आपरे बेटे खानी गेयो पर बेटे ने नींद में देख 'र बाप रो कालजो पिघल ग्यो। फेर मास्टर जी री बात याद करी के जीका मरे बांरे टाबरा ने सरकार खर्चों देवे और आ बात याद कर के जगलो आप भी खेल्डी रे डाले नीचे लटक ग्यो।
सुबह हुई तो घर रे आगे भीड़ हुई। भोलू उठ्यो, बारे निकल्यो तो बीरे जीवन रो सबसू बडो सदमो बारे हो। भोलू बाप रे पगा ने झाल कर कुकन लाग ग्यो। कई देर कुक्यो और फेर छप्परे में जा के गोरखनाथ जी रो फोटू ला के बाप री छाती माथे फेंक दियो। भोलू रे मुंडे स्यूं बस चार शबद निकल्या
"अब कोई नाथ कोनी"

जवाब देंहटाएंगजब सिरकाई